Tuesday, 2 February 2021

2020 का लेख जोखा

  नया साल शुरू हो रहा है।आप सबको नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। नया साल 2021आपको खुशहालियो से भरा पूरा रहें। सुखद व आनन्दायक हो।


वर्ष 2020 दुनिया के लिए सही नही रहा। तो हम भी उस दुनिया के वासी है तो हमारे लिए कैसे सही रहेगा।2020 जिंदगी में न भूलने वाला वर्ष  रहेगा। कोरोना काल ताउम्र याद रहेगा।


खैर.. मुझे 2020 और कारणों से याद रहेगा।


जनवरी- रामरेखा घाट बक्सर गंगा स्नान।


फ़रवरी- हरिहरनाथ दर्शन सोनपुर,गोरखनाथ दर्शन गोरखपुर , कुशीनगर।


मार्च- दार्जलिंग, संदकफू ट्रेक ,मिरिक,बक्सर से कार द्वारा पन्ना जाना ,  पन्ना टाइगर रिजर्व जंगल सफ़ारी करना , पेड़ पर बैठे तेंदुआ देखना बेहद रोमांचक रहा। 


अप्रैल- कोरोना काल मे निम्मी के चाचू बना पर मिलने के लिए 2 माह का इंतजार करना पड़ा।


 मई- कोरोना काल मे आद्यंश का चाचू बना पर मिलने के लिए 5 माह का इंतजार करना पड़ा।


जून- सोनपुर से बाइक द्वारा बक्सर जाना ।(150km) वापसी भी..

जुलाई- वर्षा का अद्भुत आनन्द लिया।


अगस्त- मनेरशरीफ बिहार, बाइक से बक्सर आना।


सितम्बर- सोनपुर से बाइक द्वारा  तुतला भवानी वाटरफॉल जाना और आनन्द लेना।(250km), सोनपुर से मुजफ्फरपुर जाकर Pankaj Mehta Traveller व Pandey Jee का साइकिल से अयोध्या यात्रा में स्वागत करना।


अक्टूबर-वृहस्पति कुंड पन्ना,लक्ष्मणपुर सेहा पन्ना, रनेह वाटरफॉल, कुटनी आइलैंड खुजराहों, वैष्णव देवी गुफा अमनौर बिहार,सोनपुर से बाइक द्वारा छपरा - बलिया होकर बक्सर जाना, ब्रहमेश्वर नाथ  का दर्शन , 


नवम्बर- अपनी बरात लेकर जाना व दुल्हन लेकर आना।


दिसंबर- अंत भला तो सब भला श्रीनगर , डलझील , शिकारा ,मुग़लगार्डेन , लालचौक, पहलगाम आरू वैल्ली, चंदनवाड़ी, बेताब वैल्ली, गुलमर्ग घूमना ।


अब_क्या_चाहिए_?


इस वर्ष कई घुमक्कड़ बन्धुओं से मुलाक़ात भी हुई। Rakesh Sharma ji, राजऋषि जी  सुरेश कात्यायन जी, Vedant Mishra जी, Amar Singh Solanki जी, Mukesh Meena जी , Anurag Verma जी, Rajesh Sharma ji,  और भी कई मित्र है।

Saturday, 6 June 2020

दो पेड़ो की गुफ्तगू सुनिए। विश्व पर्यावरण दिवस पर मैने
दो लाइन लिखने का प्रयास किया है।
             पेड़

हो रही गुफ्तगू , सुनले जरा तू।I
लगा सकता नही, तो काट ना तू।

मैं जिंदा हूं तो, करू भला तेरा,
मैं मरता हूं तो, करू भला तेरा।

तुझसे पूछता हूं, क्या ख़ता है मेरा,
फल फूल तना, हर एक पत्ता है तेरा।

फिर क्यों मारता है?   भला।

विश्व_पर्यावरण_दिवस की शुभकामनाएं।

05/06/2020
मिरिक

Tuesday, 2 June 2020

वर्ष 2019 का समापन

यह साल भी बीत रहा है । कई साल भी बीत गया। जैसे-जैसे साल बढ़ रहे हैं वैसे वैसे जिम्मेदारियां बढ रही है अनुभव बढ़ रहे हैं। यह साल मेरे लिए बहुत खास रहा कई बड़ी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक खटे मीठे अनुभव के साथ पूरा किया।

जब तक पिता जी थे तब तक कोई जिम्मेदारी ही न लिया। बीते 2017 पिता जी का असमय हम सबो को छोड़ कर चले जाना बहुत अखरता है। खैर ये तो दुनिया का रीत है आना जाना .. किसी के बस में नही है। हां अब उनके दिखाए रास्तो पर चल रहे है। हम चारो भाइयो को सब का साथ सब का सहयोग मिला ।कही कोई कमी न हो इस लिए आप सबो का आशीर्वाद चाहता हूं।

इस साल मुझे सब से ज्यादा खुशी तब हुआ । जब 85 वर्ष के मेरे बड़े नाना जी ने कहा कि तुम में समझदारी तो है पर बचपना नही गया। मैंने भी कहा कि यहीं तो मेरा गहना है जिसके वजह से आपकी चेहरे पर मुस्कान ला देता हूं। वो भी ठहाके लगाते हैं साथ मे सब ठहाके लगाते।

इस साल की रूप रेखा
★ जनवरी - बक्सर ,अहिरौली गंगा स्नान।

★ फरवरी - जगन्नाथ पुरी, चिल्का झील,लिंगराज मंदिर,उदयगिरि, खण्डगिरि,नंदनकानन चिड़ियाघर,दक्षणेश्वरी मंदिर, बेलूर मठ, विक्टोरिया पार्क ।

★ मार्च - अनिमेष के मुंडन में बक्सर से बस द्वारा विंध्याचल दर्शन, स्नान।

★अप्रैल -ओरछा, जयपुर टिकट फालतू गया।

★मई - लोकसभा चुनाव में अपना मत देना, बाइक से सोनपुर से बिहारशरीफ।

★जून - अपना उपनयन संस्कार, सोनू भैया की विवाह ,मस्ती ,बिट्टू, क्रिस्टल का जन्मदिन, पटना से बाइक द्वारा मोतिहारी जाना।

★जुलाई - पहली बारिश में नहाने, बक्सर से बाइक द्वारा बलिया जाना।

★अगस्त - माँ का सोनपुर आना, ज्योतिर्लिंग में से एक सावन में देवघर दर्शन , रक्षाबंधन, बक्सर मिलन।

★सितम्बर - बिहार में बहार..चारो तरफ बाढ़ ही बाढ़

★अक्टूबर - 'हमार बक्सर' कार्यक्रम , कई बुद्धजीवियों से मिलना, दुर्गा पूजा मेला,घर पर दीवाली।

★नवम्बर - नाना जी का तुलादान ,गाय दान में समलित होना।

★दिसम्बर - घुमक्कड़ी दिल से का मिलान समारोह में महेश्वर, ओम्कारेश्वर, ममलेश्वर में समलित होना एवम दर्शन ,कई घुमक्कड़ ,महान व्यक्तित्व के धनी लोगो से दिल से मिलना, सहस्रधारा,खण्डवा में किशोर कुमार जी का घर गांगुली हाउस देखना उनका समाधिस्थल पर नमन करना , मंदार पर्वत पर बिहार घुमक्कड़ मिलन,  वैशाली घुमक्कड़ मिलन अनन्तः प्रभा दीदी का के साथ बक्सर घूमना।

2019 बुहत सारे अनुभव के साथ गुजरा, कई हस्तियों से मिलवाया,
थोड़ा बहुत घुमक्कडी भी करवाया।कई यादें दे कर जा रहा है। आशा करता हूं कि आप सभी का यह साल अच्छा गुजरा होगा लिखने को तो बहुत हैं पर फिर कभी लिखूंगा।नए साल का सहर्ष स्वागत करता हूं। आप सभी को नया साल का मंगलकामना करता हूं। आप मुझे भी नए साल की शुभकामनाएं दे सकते है। मैं बुरा नही मानूंगा।






पटना में बाढ़ 2019

रात 10 बजे विस्तर पर जाते ही नींद लग गई। कई दिनों से डेंगू से जूझ रहे थे तो कमजोरी भी बहुत थी।दो दिनों से बारिश भी रुकने का नाम न ले रही थी। रात 12:30 के लगभग मम्मी जगी थी तो कानो में हल्की हल्की आवाज आ रही थी कि "हे भगवान अब बहुत हो गया अब रहने दो "....

03:30 के लगभग लग रहा था कि पानी गिर रहा है तो लगा कि मम्मी से नल चालू तो नही छूट गया है। इसी आहो पोह में करवट बदले तो थप से पानी पर हाथ गया। अचानक नींद खुली तो खुली रह गई... जोर से चिल्लाए मम्मी... पापा.....  पूरा घर मे पानी भर गया था थोड़ी और देर होती तो हमलोग भी पानी मे डूबते उतराते मिलते..

लाइट कटी हुई थी चारो तरफ आंधेरा और पानी ही पानी था। मोबाइल का टॉर्च जला कर जैसे तैसे कुछ समान लेकर छत पर भागे... मकान मालिक को जगाया जो कि फर्स्ट फ्लोर पर रहते है। बारिश खुलने का नाम न ले रही है। पानी और बढ़ता ही जा रहा है। जैसे तैसे सुबह हुई..पर हमारी तो शाम हो रही है। सारे कॉपी किताब , सारे सर्टिफिकेट, पानी ने लील लिया। बाकी तो सब कुछ डूब ही गया।

आज तीसरा दिन है। 20 लीटर ro का पानी था वो भी खत्म हो गया है। सरकार के तरफ से अब तक कोई मदद नही हो रही है।बारिश तो थम गई पर पानी निकलने का नाम नही ले रहा है। कुछ रिश्तेदार मदद करना चाह रहे पर वो चाह कर भी मदद नही कर पा रहे हैं। 


पटना जंक्शन का प्लेटफार्म तक पानी भरा हुआ।


बिहार के उपमुख्यमंत्री का पुल पर आसारा

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Monday, 1 June 2020

बिहार दिवस

आप सभी को बिहार दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं


22 मार्च 1912 को बंगाल से बिहार अलग हुए था। बिहार का नाम सम्भवतः बौद्ध विहारों के विहार शब्द से हुआ है जिसे विहार के स्थान पर इसके विकृत रूप बिहार से सम्बोधित किया जाता है।यह क्षेत्र गंगा तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदान में बसा है।

बिहार के उत्तर में नेपाल
पूर्व में पच्छिम बंगाल
पच्छिम में उत्तर प्रदेश
दक्षिण में झारखंड

★ बिहार को पहले मगध नाम से जाना जाता था. बिहार की राजधानी पटना का नाम पहले पाटलिपुत्र था.

★ बिहार में ही एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला (सोनपुर मेला) लगता है. बिहार के सोनपुर इलाके में यह मेला हर साल नवंबर-दिसंबर (कार्तिक पूर्णिमा) में लगता है.

★ भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद बिहार से ही थे.

★ हिंदु पुराणों के अनुसार माता सीता का जन्म भी बिहार में हुआ. इसी राज्य में भगवान राम और माता सीता का मिलन भी हुआ.

★ बिहार से ही बुद्ध और जैन धर्म की उत्पत्ति हुई. इसी राज्य में भगवान बुद्ध और महावीर का जन्म हुआ. 

★ बिहार में ही दुनिया के सबसे पुराना विश्वविद्यालय (नालंदा यूनिवर्सिटी) है. 12वीं शताब्दी के बाद इस खूबसूरत स्थान के साथ तोड़-फोड़ कर नुकसान पहुंचाया गया. इस स्थान के खंडहर हो जाने के बावजूद साल 2016 में इस स्थान को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO World Heritage) में शामिल किया गया.

★ इस राज्य में भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक माने जाने वाला मुंडेश्वरी मंदिर मौजूद है. ये मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती का है.

★ विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट भी बिहार से थे.

★ यौन संबंधों पर लिखी गई सबसे मशहूर किताब कामसूत्र को लिखने वाले लेखक वात्स्यायन भी बिहार से थे.

★ सिखों के 10वें गुरु (गुरु गोबिंद सिंह)  का जन्म भी बिहार में हुआ. हरमिंदर तख्त (पटना साहिब) पटना में है.

★ बिहार के वैशाली जिले को दुनिया का पहला गणतंत्र माना जाता है. इसी जगह पर भगवान महावीर का जन्म हुआ था.
★भारत के प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, विक्रमादित्य और अशोका भी बिहार से ही हैं.

★बिहार के 75%आबादी कृषि पर आश्रित है।

★बिहार एक ऐसा प्रदेश जो उगते सूर्य के साथ- साथ डूबते सूर्य का पुजारी (उपासक) हैं।

★बिहार की भूमि प्रायः सर्वत्र उपजाऊ एवं कृषियोग्य है। धान, गेंहूँ, दलहन, मक्का, तिलहन, तम्बाकू,सब्जी तथा केला, आम और लीची जैसे कुछ फलों की खेती की जाती है। हाजीपुर का केला एवं मुजफ्फरपुर की लीची बहुत ही प्रसिद्ध है।

✍️अभिषेक पाण्डेय


रेल हूं।

   

चली हूं जब से ,ठहरी नही तब से।
जाने कितने    चले गए    जग से।

        उत्तर से दक्षिण ,पूर्व से पच्छिम।
                       यू दौड़ने में हूं सक्षम।

खड़ा हिमालय से पिघल कर।
जाती हूं कन्याकुमारी चल कर।

       अमीर हो या गरीब,ढोती हूं सबका शरीर।
        थकती नही हूं मैं,  दम लेती हूं पहुँचाकर।

 सुनती हूं पोखरण की कथा , जैसलमेर में जलकर।
भारत का अंधकार दूर करती,अरुणाचल से चलकर।

        किसी को घर ,किसी को दफ़्तर।
पहुचाने में हर समय रहती हूं ततपर।

         लाखों का सहारा हूं अरबो का खजाना हूं।
         कर्तव्य है ध्यान रखना,मैं भी एक जनाना हूं।

झेली हूं कई विपदा , झेली हूं मैं सुनामी।
कोरोना अब मत आना, बंद है कईओ के दानापानी।

भारत का अभिषेक(तिलक)हूं, हाँ मैं रेल हूं।
  रेल होना कोई खेल नही
         झेल जाए ,ऐसा कोई मेल(पुरुष) नहीं।
जमशेदपुर (टाटा) ये पहले

न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन के बाहर खड़ा इस्टीम इंजन



               

Friday, 28 December 2018

महापर्व छठ

आस्था का महापर्व छठ आज पूर्ण हुआ।और बाल दिवस भी है तो आइए एक अबोध बालक की कहानी सुनते है।

बालक छठ से दो-तीन दिन पहले अपने दोस्तों के साथ खेल रहा होता है। तभी एक दोस्त बोलता है कि अब खेल खत्म किया जाए और चल कर छठ के लिए घाट बनाया जाए। सभी बच्चे अपने घर कुदाल,टोकरी, खुरपी,झाड़ू आदि लेने जाते है।

इस गाँव मे विद्यालय के खेल मैदान में ही पूरा गांव छठ करता है 1500…1600 के लगभग इस गांव की जनसँख्या है। तो इस मैदान में ही बेदी बना कर बेदी के दोनों तरफ छोटा छोटा गढ़ा पोखरा रूपी बनाया जाता है। क्यों कि इस गांव में नदी,तलाब,पोखर नही है।

एक बच्चे के अलावा सभी बच्चे साफ-सफाई करने के समान ले कर मैदान में पहुँचते है। और सब मिलकर उस मैदान को साफ करते है जहां एक तरफ विद्यालय है तो दूसरी तरफ कुछ लोगो के गाय भैस के गोबर पाथा गया है वही तीसरी तरफ गढ़ा कर दिया गया है। तभी एक बच्चे को ध्यान आता है कि अरे वो तो आया ही नही तब दूसरा बच्चा बोला कि अरे उसके यहां छठ नही होता है तो वो नही आया होगा। तब तीसरा बच्चा बोलता की छोड़ो ना वो नही आया तो क्या हुआ । बच्चो की काम देखकर एक चाचा बोले कि अरे वाह तुम लोग बहुत सुंदर काम कर रहे हो। छठ के दिन तुम सबको मैं पटाखे दूंगा। थोड़ा इधर भी साफ कर देना।

इधर वो बच्चा अपने घर से साफ सफाई का सामान लेकर चला ही था कि उसकी बड़ी दादी बोलती है हई देखs नबाब के जतहत बाड़े ना... ओ से बड़ कुदाल ले ले बाड़े.. का करबs...ये सुनते ही माँ दौड़ी आती है और कुदाल ले कर रख देती है। और पूछती है कि क्या करना है कुदाल से ...कही पैर पर लग जाये तो.. बच्चा बड़े प्यार से बोलता की आज सब छठ के लिए साफ सफाई कर रहा है तो हम भी जा रहे है तो माँ बोलती है अपने घर छठ नही छठ नही होता है जिसके घर छठ होता वो सब साफ सफाई कर रहे है और तुम इतना छोटे हो कि क्या साफ सफाई करोगे । माँ के बात सुनकर बच्चा को बहुत दुःख होता है कि सब के घर छठ हो रहा है मेरे घर नही होगा..मेरे सभी दोस्त को नया नया कपड़ा ख़रीदायेगा .. सब के घर बाहर से (जो नोकरी करते या शहरों में रहते वो आ रहे है ) सब आ रहे है। उदास हो कर अपने बड़े पापा के पास जा कर बोलता है (ये बच्चा माँ के बाद सबसे ज्यादा अपने बडे पिता अवधेश पाण्डेय से प्यार करता है) की पापा अपने घर छठ क्यों नही होता है ..अगले साल अपने घर भी छठ करना ..बड़े पापा प्यार से बच्चे को समझाते है। हमलोगों को छठ करना  सहता(शुभ नही होता है) नही है बच्चे का दिल टूट जाता है।


उदास मन से विद्यालय के मैदान में जाता है.. जहां छठ के लिए साफ सफाई उसके दोस्त कर रहे है। एक दोस्त देखते ही बोला अब आ रहे हो जब सब साफ हो गया.. तभी एक चाचा बोलते है कि इसके घर छठ नही होता है तो ये साफ सफ़ाई करेगा... तो बच्चा उसी चाचा से पूछता है कि क्यों मेरे घर छठ नही होता है तो मजाक में बोल देते है कि पैसा बचाने के लिए नही होता है ...हा.. हा ..हा हँसते है। वो घर से उदास हो कर आया ही था कि यहाँ भी उसे ताने सुनने को मिल गया।

छठ के दिन सुबह बड़े लोगो द्वारा छठ घाट को बहुत अच्छे से तैयार कर लिया जाता है पूरा मैदान में बेदी ही बेदी नजर आता है उस बच्चे के पड़ोस की एक दादी जिन्हे पूरा गांव चाची कहता है उनका खबर आता है कि शाम को बच्चों को तैयार कर के मेरे घर भेज देना...मेरे घर से ही सब छठ घाट जाएंगा। शाम को सब छठ घाट जाते है गांव के सब लोग एक साथ नजर आते है बहुत खुशी ख़ुशी शाम का पूजा होता है। दूसरे दिन सुबह में छठ घाट जाने के लिए माँ चार बजे से ही जगाना शुरू कर देती है.. फिर तैयार कर के दादी के साथ छठ घाट पहुँच जाते है पर बच्चे मन मे यही बात खटकते रहता है क्या सच मे पैसों के लिए छठ नही होता है.. इसी आहो..पहो में है तब तक भास्कर जी उदित होते है और सब लोग अर्घ्य देते है और प्रसाद बाटते हुए अपने अपने घर जाने लगे। हा एक बात है कि छठ मईया के कृपा से जिसके घर छठ होता है उसके घर से ज्यादा प्रसाद जिसके घर छठ नही होता उसके घर हो जाता है।

कुछ दिनों के बाद पता चलता है कि छठ के दिन ही कोई अनहोनी हो गई थी जिसके वजह से छठ नही होता है ... बीच मे कोई कोशिश किया कि फिर से छठ किया जाए तो फिर कुछ अनहोनो हो जाती है ... अब कोई डर से छठ नही करता है।

खैर अब वो बच्चा बड़ा हो गया है सर्विस करने लग गया है छठ में वो अपने सहकर्मियों छुटी जाने देता जिनके घर छठ होता है भले उसे डबल- ट्रिपल ड्यूटी करना पड़े। हां यहॉ भी प्रसादो का ढेर लग जाता है।

दुनिया का सबसे अच्छा समय,
दुनिया का सबसे अच्छा दिन,
दुनिया का सबसे हसीन पल,
सिर्फ बचपन में ही मिलता है,
इसलिए आप सभी को,
बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
✍️अभिषेक पाण्डेय