रात 10 बजे विस्तर पर जाते ही नींद लग गई। कई दिनों से डेंगू से जूझ रहे थे तो कमजोरी भी बहुत थी।दो दिनों से बारिश भी रुकने का नाम न ले रही थी। रात 12:30 के लगभग मम्मी जगी थी तो कानो में हल्की हल्की आवाज आ रही थी कि "हे भगवान अब बहुत हो गया अब रहने दो "....
03:30 के लगभग लग रहा था कि पानी गिर रहा है तो लगा कि मम्मी से नल चालू तो नही छूट गया है। इसी आहो पोह में करवट बदले तो थप से पानी पर हाथ गया। अचानक नींद खुली तो खुली रह गई... जोर से चिल्लाए मम्मी... पापा..... पूरा घर मे पानी भर गया था थोड़ी और देर होती तो हमलोग भी पानी मे डूबते उतराते मिलते..
लाइट कटी हुई थी चारो तरफ आंधेरा और पानी ही पानी था। मोबाइल का टॉर्च जला कर जैसे तैसे कुछ समान लेकर छत पर भागे... मकान मालिक को जगाया जो कि फर्स्ट फ्लोर पर रहते है। बारिश खुलने का नाम न ले रही है। पानी और बढ़ता ही जा रहा है। जैसे तैसे सुबह हुई..पर हमारी तो शाम हो रही है। सारे कॉपी किताब , सारे सर्टिफिकेट, पानी ने लील लिया। बाकी तो सब कुछ डूब ही गया।
आज तीसरा दिन है। 20 लीटर ro का पानी था वो भी खत्म हो गया है। सरकार के तरफ से अब तक कोई मदद नही हो रही है।बारिश तो थम गई पर पानी निकलने का नाम नही ले रहा है। कुछ रिश्तेदार मदद करना चाह रहे पर वो चाह कर भी मदद नही कर पा रहे हैं।
पटना जंक्शन का प्लेटफार्म तक पानी भरा हुआ।
बिहार के उपमुख्यमंत्री का पुल पर आसारा
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पटना का यह बाढ़ तो गजब कहर ढाया था। आम जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया था।
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